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    Home»छत्तीसगढ़»भारत के आधुनिक पोल्ट्री उद्योग के जनक बहादुर अली: जानिए कैसे साइकिल की दुकान से 13,000 करोड़ के साम्राज्य तक का उनका सफर रहा
    छत्तीसगढ़

    भारत के आधुनिक पोल्ट्री उद्योग के जनक बहादुर अली: जानिए कैसे साइकिल की दुकान से 13,000 करोड़ के साम्राज्य तक का उनका सफर रहा

    satya@anjorBy satya@anjorNovember 5, 2025No Comments4 Mins Read
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    छत्तीसगढ़ की धरती ने अनेक ऐसे कर्मयोगियों को जन्म दिया है जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और दूरदर्शिता से न केवल राज्य बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। इन्हीं में एक नाम है बहादुर अली, जिन्हें आज दुनिया “Father of Modern Poultry in India” के नाम से जानती है। उन्होंने अपने जीवन की प्रेरणादायी यात्रा साझा की, जो हर संघर्षरत युवा के लिए उनके अनुभव का निचोड़ है।

    संघर्ष से सफलता तक की गाथा

    राजनांदगांव जिले के एक सामान्य परिवार में जन्मे बहादुर अली के पिता साइकिल मरम्मत और लॉन्ड्री का कार्य करते थे। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी बहादुर अली और उनके भाई सुल्तान अली के कंधों पर आ गई। दोनों ने साइकिल की दुकान में काम किया, आय कम थी लेकिन सपने ऊंचे थे। यही संघर्ष उनके व्यक्तित्व को गढ़ता गया।

    छोटी शुरुआत, बड़ा सपना

    1984-85 में उन्होंने महज 200 मुर्गियों से पोल्ट्री फार्मिंग की शुरुआत की। उस समय न अनुभव था, न संसाधन—सिर्फ़ आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत थी। नागपुर में उन्होंने एक छोटी दुकान खोली और ग्राहकों को खुद चिकन बेचकर बाजार की नब्ज़ समझी। यह छोटा कदम आने वाले वर्षों में एक बड़े औद्योगिक आंदोलन की नींव बना।

    विज्ञान आधारित दृष्टिकोण

    1996 में दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पोल्ट्री कॉन्फ्रेंस ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। एक अमेरिकी विशेषज्ञ से हुई बातचीत के बाद उन्होंने महसूस किया कि पोल्ट्री व्यवसाय को वैज्ञानिक और आधुनिक तरीके से चलाना ही भविष्य है। इसके बाद उन्होंने हर प्रक्रिया को विज्ञान और अनुसंधान से जोड़ा और उद्योग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

    IB ग्रुप : संघर्ष से साम्राज्य तक

    1984 में स्थापित Indian Broiler (IB) Group आज भारत की अग्रणी पोल्ट्री कंपनी है, जिसका वार्षिक टर्नओवर 13,000 करोड़ रुपये से अधिक है। कंपनी का ब्रांड ABIS उनके और उनके भाइयों के नाम के शुरुआती अक्षरों से बना है। IB ग्रुप का मुख्यालय आज भी उनके पैतृक गांव इंदमारा (राजनांदगांव) में स्थित है—जो उनकी जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक है।

    प्रोटीन जागरूकता की मुहिम

    बहादुर अली का मानना है कि प्रोटीन हर भारतीय की थाली का अहम हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने चिकन को सस्ते और भरोसेमंद प्रोटीन स्रोत के रूप में प्रचारित किया। IB ग्रुप ने अत्याधुनिक फीड प्लांट, हेचरी और ट्रेनिंग सेंटर बनाकर किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को सशक्त किया। आज IB देश की नंबर वन प्रोटीन कंपनी के रूप में जानी जाती है।

    वैश्विक पहचान और गुणवत्ता

    IB ग्रुप ने ऐसे मानक स्थापित किए हैं जो दुनिया को अपनाने में अभी वर्षों लगेंगे। उनकी क्वालिटी, ट्रेसिबिलिटी और ट्रस्ट ने उन्हें किसानों, निवेशकों और उपभोक्ताओं के बीच पहली पसंद बना दिया है। बहादुर अली का कहना है — “हम वो तकनीक आज ला रहे हैं जिसे दुनिया कल अपनाएगी।”

    समाज सेवा और शिक्षा

    मुनाफ़ा कमाना बहादुर अली का एकमात्र लक्ष्य नहीं है। उन्होंने किसानों के लिए ‘परिवर्तन प्रोजेक्ट’ जैसी पहल शुरू की, जिसके तहत किसानों को ब्याजमुक्त ऋण और आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाता है। वे करीब 6,000 गरीब बच्चों को अपने अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूल में निःशुल्क शिक्षा दिलवा रहे हैं। ग्रामीण युवाओं को रोजगार देने के लिए भी उनके अनेक कार्यक्रम चल रहे हैं।

    महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य

    गर्भवती महिलाओं को मुफ्त प्रोटीन पाउडर उपलब्ध कराना और गांवों में जागरूकता अभियान चलाना उनकी सामाजिक सोच का हिस्सा है। वे बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देते हैं। उनकी बेटी ज़ोया आफ़रीन आलम, IB ग्रुप की डायरेक्टर हैं, जो इस समाजसेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।

    कर्मचारियों के साथ पारिवारिक रिश्ता

    IB ग्रुप अपने कर्मचारियों को परिवार का हिस्सा मानता है। उनके स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। बहादुर अली का मानना है — “कंपनी तभी सफल होती है जब उसके लोग खुशहाल हों।”

    पर्यावरण के प्रति सजगता

    बहादुर अली आने वाले वर्षों में IB ग्रुप को पूरी तरह ग्रीन एनर्जी पर आधारित बनाना चाहते हैं। उनका लक्ष्य है कि अगले तीन वर्षों में सभी प्लांट स्व-निर्मित सौर ऊर्जा से संचालित हों। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता दोनों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    प्रेरणा के प्रतीक

    बहादुर अली की कहानी यह बताती है कि कठिनाइयाँ रुकावट नहीं, बल्कि ऊंचाई तक पहुंचने की सीढ़ी होती हैं। गरीबी से उठकर वैश्विक पहचान हासिल करना, और फिर समाज को लौटाना—यह उनका जीवन दर्शन है। वे कहते हैं, “सच्चा विकास वही है जो समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।” आज बहादुर अली सिर्फ़ एक सफल उद्योगपति नहीं, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी समाजसेवी हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ की मिट्टी से निकले सपने को दुनिया के मंच तक पहुंचाया है। उनका जीवन हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखने की हिम्मत रखता है।

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