उरला | रायपुर |“न्याय भले देर से मिले, लेकिन जब मिलता है तो इतिहास बनता है”— ऐसा ही एक ऐतिहासिक और न्यायोचित संघर्ष आज उरला क्षेत्र में देखने को मिला।
पिछले 05 वर्षों से लगातार मानसिक व आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे एक मजदूर परिवार को आखिरकार न्याय मिला। मजदूर और उसका परिवार न्याय की गुहार लगाते-लगाते हर मंच से थक चुका था, लेकिन आज पार्षद बेदराम साहू के नेतृत्व में हुए जनसंघर्ष ने तस्वीर बदल दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार,
तहसील धरसीवा द्वारा पहले ही कुर्की वारंट जारी किए जाने के बावजूद भी संबंधित कंपनी प्रबंधन द्वारा किसी प्रकार की संवेदनात्मक या वैधानिक कार्यवाही नहीं की गई। मजदूर को उसके मेहनत का वैधानिक हक देने में लगातार टालमटोल की जाती रही।
✊ जब निवेदन बेअसर हुआ, तब हुआ घेराव
पार्षद बेदराम साहू ने कई बार कंपनी प्रबंधन से शांतिपूर्ण निवेदन किया, लेकिन जब कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तब घेराव का रास्ता अपनाया गया। इस घेराव में वार्ड क्रमांक 05 सहित सैकड़ों नगरवासी मजदूर परिवार के साथ मजबूती से खड़े हो गए।
जनदबाव और एकजुटता का असर यह हुआ कि—
👉 हनुमान लोहा प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री, उरला द्वारा
👉 मंतराम साहू, पिता – नारायण साहू
👉 निवासी – वार्ड क्रमांक 05, मटखनवापा पारा, उरला
👉 को ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) की पूरी राशि चेक के माध्यम से अदा की गई।
यह राशि मजदूर की मेहनत और उसके वैधानिक अधिकार की संपूर्ण रकम है।
🤝 “एकजुटता ही हमारा उद्देश्य” – बेदराम साहू
इस अवसर पर पार्षद बेदराम साहू ने कहा—
“हमारा उद्देश्य केवल और केवल मजदूर को न्याय दिलाना है। जब तक अन्याय रहेगा, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। आज यह जीत अकेले किसी एक की नहीं, बल्कि पूरे समाज की एकजुटता की जीत है।”
👥 इन सामाजिक कार्यकर्ताओं व नागरिकों की रही अहम भूमिका
इस न्यायोचित संघर्ष में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, साथी एवं जागरूक नागरिक उपस्थित रहे—
बेदराम साहू (पार्षद),
भागीरथी यादव (अध्यक्ष, मां बंजारी मंडल),
डेविड साहू, गौतम साहू, डोमेश देवांगन, अंकित देवांगन,
नानचंद साहू, प्रकाश दिवान, अजय साहू,
अश्वनी साहू, अश्वनी जघेल, जीवन साहू, रामपाल साहू,
युगल साहू, नंदकुमार यादव, राकेश सेन,
गेंदलाल साहू, उमेश धीवर, युवराज साहू,
नरेश साहू, श्रवण साहू, मीनू,
राजवंती विश्वकर्मा, आरती नायक, सुखबाई नायक,
रोशन दास, विशाल पांके, गेंददास मानिकपुरी।


