रायपुर/बीरगांव: छत्तीसगढ़ के बीरगांव नगर निगम में मतदाता सूची के नाम पर हुए ‘खेल’ ने अब कानूनी लड़ाई का रूप ले लिया है। कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश और जिला निर्वाचन आयोग को कड़ा ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि अगर इन गंभीर विसंगतियों का तत्काल निराकरण नहीं हुआ, तो वे हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेंगे।

लोकतंत्र पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’? 38,000 वोटर लिस्ट से बाहर!
बीरगांव की नई मतदाता सूची (SIR) ने चुनावी गणित को पूरी तरह हिला दिया है। दस्तावेजों के अनुसार, 2023 विधानसभा चुनाव में जहाँ यहाँ 95,000 वोटर थे, वहीं अब सिर्फ 57,018 बचे हैं। यानी 38,000 वोटरों के नाम काट दिए गए! इसे गरीबों और मजदूरों के खिलाफ एक बड़ी साजिश बताया जा रहा है।
लिस्ट में ‘भूतिया’ एड्रेस: मकान नंबर की जगह मंदिर और कब्रिस्तान!
शिकायती पत्र में जो सबूत दिए गए हैं, वे चुनाव प्रणाली की पोल खोलते हैं:
अजीबोगरीब पते: मकान नंबर के कॉलम में ‘मकान नंबर’ की जगह ‘शून्य (0)’, ‘दुर्गा मंदिर’, ‘कब्रिस्तान’, ‘पप्पू किराना’ और ‘मुक्ति धाम’ जैसे नाम दर्ज हैं।
असंभव आंकड़े: मकान नंबर 499 में 2100 वोटर और मकान नंबर 750 में 800 वोटरों के नाम दर्ज कर दिए गए हैं। क्या एक ही घर में हज़ारों लोग रह सकते हैं?
करोड़ों में मकान संख्या: प्रशासन की लापरवाही ऐसी कि कई जगहों पर मकान नंबर करोड़ों के अंकों में लिखे गए हैं, जो व्यावहारिक रूप से नामुमकिन हैं।
आयोग को अल्टीमेटम: “सुधर जाओ, वरना कोर्ट में मिलेंगे”
पूर्व महासचिव (प्रदेश कांग्रेस कमेटी) पंकज शर्मा और पार्षद इकराम अहमद ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल टाइपिंग की गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने प्रदेश निर्वाचन आयोग और जिला निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपकर इन 123 बूथों की धांधली पर सख्त आपत्ति जताई है।
नेताओं का सीधा संदेश: “हमने आयोग को सभी सबूत सौंप दिए हैं। अगर प्रशासन ने इन गंभीर गलतियों को तुरंत ठीक नहीं किया और कटे हुए पात्र वोटरों के नाम वापस नहीं जोड़े, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। लोकतंत्र की रक्षा के लिए हम माननीय हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और जनहित याचिका (PIL) लगाएंगे।”
प्रशासन पर उठते गंभीर सवाल:
क्या जानबूझकर अल्पसंख्यक और एससी-एसटी बहुल इलाकों के नाम काटे गए हैं?
क्या जिला निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों ने सूची के वेरिफिकेशन में आँखें मूंद ली थीं?
करोड़ों के मकान नंबर और ‘शून्य’ एड्रेस वाली लिस्ट को मंजूरी कैसे मिली?
बीरगांव की जनता अब जवाब मांग रही है। देखना होगा कि निर्वाचन आयोग इस ‘महाघोटाले’ पर क्या सफाई देता है या फिर यह मामला सीधे हाईकोर्ट की चौखट पर सुलझेगा।
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