धरसींवा | रिपोर्ट – मोहम्मद याकुब
शासकीय नागार्जुन विज्ञान महाविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में आज आयोजित ऐलुमिनी मीट, छात्र सम्मेलन एवं सम्मान समारोह ने पुरानी यादों को फिर से ताज़ा कर दिया। इस भव्य कार्यक्रम में 1995 से 2025 बैच तक के विद्यार्थी शामिल हुए। दशकों के बाद पुराने दोस्तों से मिलकर सभी के चेहरे खिल उठे—कई साथी एक-दूसरे से गले मिले, हाथ मिलाए और कॉलेज के दिनों को याद करते हुए भावुक हो उठे।
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GSI और प्रतिष्ठित संस्थानों से आए अतिथियों की उपस्थिति
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे—
अमित धारवड़कर, डिप्टी डायरेक्टर जनरल, GSI
डॉ. बेनिधर देशमुख, प्रोफेसर, भूविज्ञान, IGNOU दिल्ली
डॉ. अमिताभ बनर्जी, प्राचार्य, शासकीय नागार्जुन विज्ञान महाविद्यालय
कार्यक्रम में कई भूतपूर्व छात्र जो वर्तमान में माइनिंग इंस्पेक्टर, GSI वैज्ञानिक, तथा अन्य महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं, वे भी शामिल हुए।
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पूर्व छात्रों का बड़ा योगदान – विभाग को मिले ₹5 लाख के उपकरण
भूतपूर्व छात्रों ने भूविज्ञान विभाग को लगभग ₹5 लाख मूल्य के लैब उपकरण भेंट किए, जिससे छात्रों को उन्नत प्रयोगात्मक सुविधाएं प्राप्त होंगी। यह योगदान विभागीय शोध एवं शिक्षा गुणवत्ता को नई दिशा देगा।
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जियोलॉजी क्षेत्र में संभावनाओं और तकनीक पर मार्गदर्शन
कार्यक्रम का उद्देश्य जियोलॉजी क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं, पर्यावरणीय संरक्षण, आधुनिक तकनीकों और रोजगार अवसरों पर चर्चा करना था।
विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप वानसूत्रे ने बताया—
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद भूविज्ञान के सिलेबस में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
अब छात्रों को ड्रोन टेक्नोलॉजी, DGPS प्रणाली, भारतीय ज्ञान तंत्र, तथा आधुनिक भू-तकनीकी पद्धतियों के साथ कार्य करने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से नए छात्रों को सफल पूर्व छात्रों से प्रेरणा और दिशा मिलती है।
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सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में पूर्व छात्र उपस्थित समारोह में शामिल प्रमुख भूतपूर्व छात्र थे—
विनयधर दीवान, हितेश सोनकर, घनश्याम शाकार, मोहम्मद याकूब, विनय साहू, रामकमल बानी, सुभाष साहू, प्रमोद नायक, मेघा झा, गौरव नेताम, हेलेंद्र स्वर्णपाल, भूपेंद्र यादव, शाहिद अली, देवेंद्र साहू, राकेश वर्मा सहित कई अन्य साथी।
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निष्कर्ष
शासकीय नागार्जुन विज्ञान महाविद्यालय का यह ऐलुमिनी मीट सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों को जोड़ने वाला यादों का संगम बन गया। पूर्व छात्र, वर्तमान विद्यार्थी और प्राध्यापक—सभी ने इसे एक यादगार दिन के रूप में संजोया।


