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    Home»छत्तीसगढ़»सतनामी समाज के गौरव स्वतंत्रता सेनानी स्व. रेशमलाल जांगड़े जी को जयंती पर कोटि-कोटि नमन
    छत्तीसगढ़

    सतनामी समाज के गौरव स्वतंत्रता सेनानी स्व. रेशमलाल जांगड़े जी को जयंती पर कोटि-कोटि नमन

    https://satyakeanjor.com/?p=79665
    satya@anjorBy satya@anjorFebruary 15, 2026Updated:February 15, 2026No Comments3 Mins Read
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    महान विभूति के सम्मान में संस्थान नामकरण व पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग – मोहन बंजारे

    रायपुर। सतनामी समाज के गौरव, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक एवं अविभाजित मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ से सात बार सांसद रहे श्रद्धेय स्व. रेशमलाल जांगड़े जी की 15 फरवरी जयंती पर प्रदेशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रगतिशील छग सतनामी समाज के प्रदेश महासचिव मोहन बंजारे ने उन्हें नमन करते हुए राज्य सरकार से मांग की है कि उनके सम्मान में किसी प्रमुख शासकीय संस्थान का नामकरण किया जाए तथा उनके जीवन संघर्ष को छत्तीसगढ़ के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

    स्व. रेशमलाल जांगड़े जी का जन्म 15 फरवरी 1925 को अविभाजित मध्यप्रदेश के रायपुर जिले (वर्तमान बलौदाबाजार-भाटापारा) के ग्राम परसाडीह में हुआ था। वे बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत थे और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण जेल भी गए। उन्होंने छत्तीसगढ़ महाविद्यालय रायपुर से स्नातक तथा 1949 में नागपुर लॉ कॉलेज से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की और सतनामी समाज के प्रथम विधि स्नातक होने का गौरव हासिल किया।

    वे 1950-52 के दौरान अंतरिम संसद के मनोनीत सदस्य रहे। स्वतंत्र भारत के प्रथम आम चुनाव 1952 में मात्र 25 वर्ष की आयु में बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए तथा 1957 में पुनः सांसद बने। उन्होंने 1956 में लोकसभा में सर्वप्रथम पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की अवधारणा रखी। पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय की स्थापना सहित रेल परियोजनाओं, सिंचाई, संचार एवं सामाजिक न्याय के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

    वे भटगांव से विधायक चुने गए और मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारों की रक्षा में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए। ममतामयी मिनीमाता के साथ मिलकर लोकसभा में अस्पृश्यता निवारण बिल लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने सांसद वेतन से 50 से अधिक छात्रावास संचालित कर विद्यार्थियों को शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई।

    गिरौदपुरी धाम मेला समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने बाबा गुरु घासीदास जी के विचारों के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई। सादा जीवन, उच्च विचार के धनी स्व. जांगड़े जी को छत्तीसगढ़ की राजनीति का संत कहा जाता है।

    उन्हें वर्ष 2010 में गुरु घासीदास दलित चेतना राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। 13 मई 2013 को संसद में वरिष्ठतम सांसद सदस्य के रूप में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा सम्मानित किया गया। 11 अगस्त 2014 को उनका निधन हो गया।

    प्रदेश महासचिव मोहन बंजारे ने कहा कि ऐसे महान विभूति को उपेक्षित न रखते हुए उनके नाम पर कॉलेज, अस्पताल या जलाशय का नामकरण किया जाना चाहिए तथा उनके जीवन संघर्ष को पाठ्यक्रम में शामिल कर नई पीढ़ी को प्रेरित किया जाना चाहिए।

    छत्तीसगढ़ राज्य एवं सतनामी समाज ने उनकी जयंती पर कृतज्ञतापूर्वक कोटि-कोटि नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

    संपर्क:

    मोहन बंजारे

    प्रदेश महासचिव, प्रगतिशील छग सतनामी समाज

    मो. 9575899100

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