*कलेक्टर के निरीक्षण के बाद रिसदा -सुहेला बायपास निर्माण में तेजी आने की उम्मीद*

बलौदाबाजार – 15 अक्टूबर 2026 ! जिले की बदहाल सड़कों को लेकर आम जनता की परेशानी और प्रशासन की सक्रियता के बीच का अंतर एक बार फिर चर्चा में है। बुधवार कों रिसदा बाईपास और बलौदाबाजार-सुहेला सड़क निर्माण कार्य का कलेक्टर कुलदीप शर्मा द्वारा निरीक्षण कर ठेकेदार को मशीनरी, मैनपावर बढ़ाने तथा नियमित पानी छिड़काव के निर्देश देना निश्चित रूप से आवश्यक कदम है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर प्रशासन को यह सुध लेने में इतना लंबा समय क्यों लग गया?

बारिश के दौरान रिसदा बाईपास सड़क की स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि परेशान लोगों ने इसे नरक जाने का रास्ता तक कहना शुरू कर दिया था। सड़क की दुर्दशा को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित हुए, व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए प्रशासन तक सैकड़ों आवेदन पहुंचे और सोशल मीडिया पर भी प्रशासन से लेकर मंत्री व मुख्यमंत्री तक को लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, आम नागरिकों को करीब पांच महीने तक बदहाल सड़क की पीड़ा झेलनी पड़ी। अब जब कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की समीक्षा की है, तो लोग प्रशासन की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए चुटकी ले रहे हैं कि साहब, बड़ी जल्दी पहुंच गए!

कलेक्टर के निरीक्षण के दौरान बलौदाबाजार-सुहेला सड़क निर्माण की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई गई। ठेकेदार को मशीनरी, पेवर और श्रमिकों की संख्या बढ़ाने के साथ 15 दिनों का कार्ययोजना प्रस्तुत करने तथा प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट लेने के निर्देश दिए गए। वहीं, रिसदा बाईपास सड़क पर मशीनरी नहीं लगाए जाने और काम बंद रहने पर भी नाराजगी जाहिर की गई।
ये निर्देश बताते हैं कि निर्माण कार्यों में लापरवाही और धीमी गति जैसी समस्याएं प्रशासन के संज्ञान में आ चुकी हैं। लेकिन सवाल यह भी है कि जब सड़क की दुर्दशा से आम लोग रोजाना जूझ रहे थे, तब संबंधित विभाग के अधिकारी नियमित निगरानी क्यों नहीं कर रहे थे? ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर पहले ही सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई? क्या प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए लगातार खबरों, आवेदनों और सोशल मीडिया पर जनाक्रोश का इंतजार करना पड़ता है?

सड़क निर्माण में देरी का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है। धूल से परेशान राहगीर, दुर्घटना की आशंका के बीच सफर करते वाहन चालक और रोजाना आवागमन करने वाले ग्रामीण ही इस बदहाल व्यवस्था की वास्तविक कीमत चुकाते हैं। ऐसे में पानी छिड़काव, मशीनरी बढ़ाने और कार्ययोजना बनाने के निर्देश तभी सार्थक होंगे, जब उनका असर जमीन पर दिखाई देगा।
रिसदा बाईपास पर निर्माण कार्य बाधित होने के पीछे ग्राम पंचायत कुकुरडीह के सरपंच द्वारा जमीन संबंधी कारणों से व्यवधान उत्पन्न किए जाने की बात ठेकेदार ने निरीक्षण के दौरान कही। इस पर कलेक्टर ने एसडीएम एवं तहसीलदार को तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन संबंधित बाधाओं का निराकरण कितनी जल्दी करता है और सड़क निर्माण वास्तव में कब गति पकड़ता है।

*निरीक्षण नहीं, समयबद्ध कार्रवाई चाहती है जनता*

प्रशासनिक निरीक्षण और सख्त निर्देश सरकारी व्यवस्था का जरूरी हिस्सा हैं, लेकिन जनता के लिए इनका महत्व तभी है, जब समस्याओं का समय पर समाधान हो। पांच महीने तक बदहाल सड़क की परेशानी झेलने के बाद लोगों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि राहत चाहिए।
कलेक्टर के निरीक्षण के बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि संबंधित अधिकारी और ठेकेदार कार्य को गंभीरता से लेते हुए निर्माण में तेजी लाएंगे। हालांकि, आम लोगों के मन में उठ रहा सवाल अब भी कायम है कि जब सड़क की बदहाली सबको दिखाई दे रही थी, तब प्रशासन की नजर इतनी देर से क्यों पड़ी?
फिलहाल, निरीक्षण के बाद दिए गए निर्देशों की असली परीक्षा मौके पर होने वाले काम और सड़क की स्थिति में आने वाले सुधार से होगी।

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