नई दिल्ली/दुबई। अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तट पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े सैन्य ठिकानों, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जॉर्डन, बहरीन, इराक और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। कई मिसाइलों और ड्रोन को क्षेत्रीय एयर डिफेंस सिस्टम ने intercept किया। इराक में भी ईरान समर्थित समूहों से जुड़े ड्रोन हमलों की खबर सामने आई है।
ईरान का संदेश स्पष्ट है कि अमेरिकी सैन्य दबाव का जवाब दिया जाएगा। हालांकि, तेहरान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह जवाबी कार्रवाई को कितना बढ़ाए, ताकि अमेरिका के साथ पूर्ण पैमाने के युद्ध का खतरा और न बढ़े।
अब ईरान के पास क्या विकल्प हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान के पास कई स्तरों पर जवाब देने के विकल्प हैं। इनमें अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सीमित मिसाइल और ड्रोन हमले, क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगियों पर दबाव और समुद्री मार्गों में अस्थिरता पैदा करना शामिल हो सकता है। सबसे संवेदनशील मुद्दा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अगर हॉर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित होती है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और दुनिया भर में महंगाई तथा ऊर्जा संकट का दबाव बढ़ सकता है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।
क्या संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदल सकता है?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है। दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ एक-दूसरे पर दबाव बढ़ा रहे हैं, लेकिन पूर्ण युद्ध दोनों के लिए बेहद महंगा साबित हो सकता है।
ईरान पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री दबाव से गंभीर आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका के लिए भी लंबे समय तक मध्य पूर्व में व्यापक सैन्य अभियान चलाना बड़ी रणनीतिक और आर्थिक चुनौती हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से आगे जवाबी कार्रवाई होने पर और कड़े हमलों की चेतावनी दी है। वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं।
दुनिया की नजर हॉर्मुज़ पर
इस पूरे संकट का सबसे बड़ा वैश्विक प्रभाव तेल और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पहले ही प्रभावित हुई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक मंगलवार को केवल चार वाणिज्यिक जहाज इस मार्ग से गुजरे, जबकि सामान्य 10-दिवसीय औसत करीब 13 जहाज प्रतिदिन था।
यदि तनाव और बढ़ता है तो एशिया, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में ऊर्जा कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच ताजा टकराव ने एक बार फिर पूरे मध्य पूर्व को बड़े युद्ध के खतरे के सामने खड़ा कर दिया है। तेहरान के पास जवाबी कार्रवाई के कई विकल्प हैं, लेकिन हर अगला कदम अमेरिका की ओर से और बड़ी सैन्य प्रतिक्रिया को जन्म दे सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि ईरान सीमित जवाब तक रहता है या संघर्ष को नए मोर्चों तक ले जाता है।
