काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है, जबकि 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल पांचवें दिन भी मलबे और बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिंदगी की तलाश में जुटे हैं।
ग्लेशियर ढहने के बाद आई तबाही
बताया जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर से जुड़ी बर्फ और चट्टानों के ढहने के बाद अचानक भारी मात्रा में पानी, मलबा और कीचड़ नीचे की ओर बहा। इसकी चपेट में कई गांव, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं आ गईं।
मलबे में फंसे लोगों को निकालने की पूरा प्रयास
रेस्क्यू टीमें लगातार मलबा हटाकर लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। कई इलाकों में खराब मौसम, बढ़ता जलस्तर और दुर्गम पहाड़ी इलाका बचाव अभियान में बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब तक करीब 9,435 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
नदियों का जलस्तर बढ़ने से फिर अलर्ट
प्रशासन ने भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में लोगों और बचाव दलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। अधिकारियों को आशंका है कि लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर से हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। �
भारत भी राहत एवं बचाव में जुटा
नेपाल की त्रासदी के बीच भारत ने भी सहायता बढ़ाई है। भारतीय पक्ष की ओर से फंसे लोगों को निकालने के साथ-साथ विशेषज्ञ टनल-रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमों की मदद दी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने 149 लोगों के सुरक्षित निकाले जाने की सूची भी साझा की है।
फिलहाल नेपाल के कई प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने, मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश का अभियान जारी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम इलाकों तक पहुंचकर संभावित जीवित लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालना है।
