मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहते हैं। उनकी मौजूदा फिटनेस दिनचर्या में पावरलिफ्टिंग के साथ नियमित वॉकिंग भी शामिल है। हाल ही में एक बातचीत में हुड्डा ने बताया कि उनका वर्कआउट लक्ष्य और भूमिकाओं के हिसाब से बदलता रहता है, लेकिन फिलहाल वह पावरलिफ्टिंग पर काफी ध्यान दे रहे हैं।
पावरलिफ्टिंग से बढ़ती है ताकत
पावरलिफ्टिंग में मुख्य रूप से स्क्वाट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट जैसे कंपाउंड एक्सरसाइज शामिल होते हैं। ये शरीर की कई मांसपेशियों को एक साथ सक्रिय करते हैं और ताकत, मांसपेशियों की क्षमता तथा शरीर की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का असर केवल मांसपेशियों तक सीमित नहीं रहता। नियमित प्रतिरोधक व्यायाम हड्डियों की मजबूती और शरीर की दैनिक गतिविधियों को बेहतर ढंग से करने की क्षमता में भी योगदान दे सकता है।
फिर वॉकिंग क्यों जरूरी?
भारी वजन उठाने वाली एक्सरसाइज के मुकाबले वॉकिंग बेहद सरल और कम प्रभाव वाला व्यायाम है। नियमित तेज चाल से चलना हृदय-स्वास्थ्य, गतिशीलता और ऊर्जा खर्च को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।
यही वजह है कि पावरलिफ्टिंग जैसी कठिन ट्रेनिंग के साथ वॉकिंग शरीर को बिना ज्यादा अतिरिक्त दबाव दिए सक्रिय रखने का एक आसान तरीका बन सकती है।
स्ट्रेंथ और कार्डियो का संतुलन है जरूरी
फिटनेस के लिए सिर्फ मांसपेशियां बनाना या केवल कार्डियो करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शरीर की ताकत और कार्यक्षमता पर काम करती है, जबकि वॉकिंग जैसी एरोबिक गतिविधियां हृदय और सहनशक्ति के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
रणदीप हुड्डा का फिटनेस रूटीन इसी संतुलन की ओर इशारा करता है—भारी ट्रेनिंग के साथ हल्की लेकिन नियमित गतिविधि।
रिकवरी को भी देते हैं महत्व
भारी वजन के साथ ट्रेनिंग शरीर और मांसपेशियों पर अधिक दबाव डालती है। इसलिए पर्याप्त आराम, नींद, पोषण और सही ट्रेनिंग तकनीक बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हर दिन अत्यधिक कठिन ट्रेनिंग करने के बजाय शरीर को पर्याप्त रिकवरी देना भी फिटनेस का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हर किसी के लिए जरूरी नहीं पावरलिफ्टिंग
पावरलिफ्टिंग प्रभावी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हो सकती है, लेकिन शुरुआती लोगों को भारी वजन उठाने से पहले सही तकनीक सीखना और जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित विशेषज्ञ की निगरानी लेना चाहिए। फिटनेस हासिल करने के लिए हर व्यक्ति को अत्यधिक भारी वजन उठाना जरूरी नहीं है।
रणदीप हुड्डा की फिटनेस दिनचर्या से एक बड़ी सीख यह है कि फिटनेस का मतलब सिर्फ कठिन वर्कआउट नहीं, बल्कि ताकत, नियमित गतिविधि, रिकवरी और संतुलित जीवनशैली का सही मेल है।
सत्य के अंजोर न्यूज | फिटनेस डेस्क
