रायपुर | 21 मार्च 2026 ! छत्तीसगढ़ में लगातार हो रहे सीवर हादसों के बीच रामकृष्ण हॉस्पिटल सीवर कांड ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या प्रबंधन पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकार को घेरा है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने तीखा बयान देते हुए कहा कि रामकृष्ण हॉस्पिटल में सीवर टैंक की मैनुअल सफाई के दौरान तीन लोगों की दर्दनाक मौत हुई, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले: अशोका बिरयानी में हादसा ,गुड़ाखू फैक्ट्री में मजदूरों की मौत इन घटनाओं के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

⚖️ नियम बने, लेकिन पालन नहीं

धनंजय सिंह ठाकुर ने बताया कि:

साल 2022 में सरकार ने नियम तय किए थे

सीवर/सेप्टिक टैंक हादसे में ठेकेदार, प्रबंधन, निगम आयुक्त और मुख्य अभियंता को जिम्मेदार माना जाएगा

इसके बावजूद आज तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई

👉 सवाल: जब जिम्मेदारी तय है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?

⚠️ “यह दुर्घटना नहीं, सरकारी हत्या है”

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा:

“प्रदेश में हो रही ये मौतें हादसे नहीं, बल्कि सरकारी हत्या हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि:

मशीनों की जगह मजदूरों को सीवर में उतारा जा रहा है

सुरक्षा उपकरण तक उपलब्ध नहीं कराए जाते

यह प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत का नतीजा है

🚫 कोर्ट और केंद्र के निर्देशों की अनदेखी सीवर सफाई पूरी तरह मशीन से करने के निर्देश हैं “जीरो फेटलिटी” का लक्ष्य तय किया गया है इसके बावजूद मैनुअल सफाई जारी है

👉 इसे न्यायालय और केंद्र सरकार के निर्देशों का उल्लंघन बताया गया

🔥 कांग्रेस का सीधा आरोप

कांग्रेस ने कहा कि:

प्रदेश सरकार संवेदनहीन हो चुकी है ,मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं नियम सिर्फ कागजों में हैं, जमीन पर मौत का खेल जारी है

📢 मुख्य मांगें

रामकृष्ण हॉस्पिटल प्रबंधन पर कार्रवाई

निगम आयुक्त और मुख्य अभियंता को जिम्मेदार ठहराया जाए

मैनुअल सीवर सफाई पर पूरी तरह रोक

मृतकों के परिवार को न्याय और मुआवजा

📌 निष्कर्ष

रामकृष्ण हॉस्पिटल सीवर हादसा अब सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी विफलता बनकर सामने आया है। सवाल यही है — क्या इस बार जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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