होली विशेषांक | बिरगांव निगम चुनाव 2026
नगर निगम बिरगांव में सियासी रंग चढ़ने लगे, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
रायपुर। होली के रंगों के बीच बिरगांव की सियासत भी गर्माने लगी है। लगभग 7–8 माह बाद प्रस्तावित नगर निगम बिरगांव चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा ने अंदरखाने तैयारियां तेज कर दी हैं। वर्तमान में निगम पर कांग्रेस का कब्जा है, जबकि प्रदेश में भाजपा की सरकार और स्थानीय विधायक भी भाजपा से हैं—ऐसे में यह चुनाव दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनता दिख रहा है।
महिला आरक्षण से बदले समीकरण
इस बार महापौर पद सामान्य महिला आरक्षित होने से मुकाबला और रोचक हो गया है। प्रत्याशी चयन ही जीत-हार की दिशा तय करेगा।
कांग्रेस में स्थिति स्पष्ट?
कांग्रेस खेमे में वर्तमान महापौर नंदलाल देवांगन की धर्मपत्नी श्रीमती लता देवांगन की सक्रियता चर्चा में है। वे लगातार क्षेत्र में मौजूदगी दर्ज करा रही हैं, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
अन्य संभावित नामों में पूर्व पार्षद लुकेश्वरी लखन साहू का जिक्र है, लेकिन फिलहाल लता देवांगन सबसे प्रबल दावेदार के रूप में उभरती दिख रही हैं। पूर्व विधायक का समर्थन भी उन्हें मिल सकता है, ऐसी चर्चाएं हैं।
भाजपा में घमासान तय
भाजपा में संभावित दावेदारों की लंबी सूची से मुकाबला रोचक हो सकता है। प्रमुख नामों में—
पूर्व महापौर अंबिका यदु
श्रीमती पद्मा चंद्राकर
पद्मावती ओमप्रकाश साहू
डिगेश्वरी एवज देवांगन
शकुन डेविड साहु
सुनीता वर्मा
हालांकि अंबिका यदु और पद्मा चंद्राकर पुराने चेहरे हैं, पर उनकी सक्रियता सीमित बताई जा रही है। वर्तमान पार्षद डिगेश्वरी एवज देवांगन और शकुन डेविड साहु के नाम भी चर्चा में हैं। पद्मावती ओमप्रकाश साहू की दावेदारी को नेता प्रतिपक्ष का समर्थन मिलने की बात सामने आ रही है।
भाजपा संगठन में मंडल अध्यक्ष भागीरथी यादव भी काफी सक्रिय माने जा रहे हैं। वे पूर्व में एल्डरमैन और महापौर प्रतिनिधि रह चुके हैं तथा अपनी पत्नी को मैदान में उतार सकते हैं—ऐसी अटकलें हैं।
बड़े नेताओं की भूमिका अहम
बिरगांव की सामाजिक संरचना को “मिनी भारत” कहा जाता है, जहां जातीय समीकरण अक्सर अप्रत्याशित परिणाम देते हैं। रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के विधायक मोतीलाल साहू की पसंद को विशेष महत्व मिल सकता है। साथ ही सांसद बृजमोहन अग्रवाल की भूमिका भी प्रत्याशी चयन में निर्णायक मानी जा रही है।
विकास बनाम वर्चस्व की लड़ाई
प्रदेश में साय सरकार के ढाई साल के विकास कार्य भी चुनावी मुद्दा बन सकते हैं। कांग्रेस जहां निगम में अपने कार्यकाल को उपलब्धियों के रूप में पेश करेगी, वहीं भाजपा राज्य सरकार की योजनाओं और संगठनात्मक मजबूती के दम पर मुकाबला करेगी।
कुल मिलाकर, बिरगांव महापौर प्रत्याशी चयन में दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की पसंद ही अंतिम मुहर लगाएगी।
नोट: यह विशेष सर्वे एवं राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित खबर है। चुनाव में अभी 7–8 माह का समय शेष है।
