नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी ने मनरेगा कानून को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मनरेगा कानून को कमजोर कर देश के करोड़ों किसानों, श्रमिकों और भूमिहीन ग्रामीण गरीबों के हितों पर सीधा हमला किया है।
सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना ने ग्रामीण भारत को रोजगार, सम्मान और सुरक्षा दी थी, लेकिन मौजूदा सरकार इसे योजनाबद्ध तरीके से खत्म करने पर तुली हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह तय दिल्ली में बैठकर किया जा रहा है कि किसे, कितना, कहां और किस तरह रोजगार मिलेगा, जिससे जमीनी हकीकत और जरूरतों की अनदेखी हो रही है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा अधिकार आधारित कानून है, लेकिन सरकार इसे एक सीमित और नियंत्रित योजना में बदलने का प्रयास कर रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
सोनिया गांधी ने आगे कहा,
“अफसोस की बात है कि मोदी सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया। न सिर्फ महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, बल्कि मनरेगा के स्वरूप को मनमाने ढंग से बदल दिया गया।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बजट में कटौती, मजदूरी भुगतान में देरी और काम के अवसर कम किए जाने से गरीब परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है। कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की कि मनरेगा को कमजोर करने की बजाय इसे और मजबूत किया जाए ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके।
कांग्रेस ने साफ किया कि वह किसानों, मजदूरों और गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।
