हसौद/सक्ती/रायपुर। मां महामाया की पुण्यधरा हसौद एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनी, जब अखिल भारतीय विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित 251 कुण्डीय विराट गायत्री महायज्ञ ने पूरे छत्तीसगढ़ को संस्कार, साधना और सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। यह ऐतिहासिक आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि सामाजिक जागरण और सांस्कृतिक एकता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।

 

इस विराट महायज्ञ में छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री तथा सक्ती जिला प्रभारी मंत्री माननीय गुरु खुशवंत साहेब जी ने विशेष अतिथि के रूप में सहभागिता कर आयोजन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके साथ मुख्यमंत्री माननीय श्री विष्णु देव साय एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति माननीय डॉ. चिन्मय पंड्या की उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक प्रखर बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी की सरलता, सहज संवाद शैली और जनसरोकारों से जुड़ा व्यक्तित्व श्रद्धालुओं एवं आमजन के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ जैसे आयोजन समाज में संस्कारों का संचार, सकारात्मक सोच का विस्तार और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का कार्य करते हैं। ऐसे आध्यात्मिक प्रयास मानव जीवन को दिशा देने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।

 

महायज्ञ के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह भावनात्मक एवं प्रेरणादायक क्षणों का साक्षी बना। मुख्यमंत्री जी एवं मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी ने नवविवाहित दंपतियों को आशीर्वाद प्रदान कर उनके सुखद, समृद्ध एवं मंगलमय वैवाहिक जीवन की कामना की। इस अवसर पर उनकी आत्मीय उपस्थिति से नवदंपतियों के चेहरे पर उल्लास और वातावरण में अपनत्व की अनुभूति स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

 

इस भव्य आयोजन में गायत्री परिवार के वरिष्ठ पदाधिकारी, भाजपा कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में गुरु खुशवंत साहेब जी के जनसेवी व्यक्तित्व, सामाजिक समर्पण और आध्यात्मिक आयोजनों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता की सराहना की।

 

251 कुण्डीय विराट गायत्री महायज्ञ ने यह संदेश दिया कि जब आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सरोकार और जनप्रतिनिधियों की सकारात्मक सहभागिता एक मंच पर आती है, तो समाज में परिवर्तन की एक नई ऊर्जा जन्म लेती है। हसौद का यह आयोजन निश्चित ही आने वाले समय में आध्यात्मिक और सामाजिक जागरण की एक प्रेरक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।

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