नई दिल्ली, 26 अगस्त 2026। टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रही महिलाओं के लिए शाकाहारी आहार और 14 घंटे के समय-सीमित उपवास का संयोजन रक्त शर्करा नियंत्रण में सुधार से जुड़ा पाया गया है। Nutrition & Diabetes में प्रकाशित 24 सप्ताह के एक भारतीय रैंडमाइज्ड नियंत्रित अध्ययन में इस संयुक्त आहार-पद्धति के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

अध्ययन में 25 से 60 वर्ष की आयु की टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित 96 महिलाओं को शामिल किया गया, जिनमें से 90 ने अध्ययन पूरा किया। एक समूह को सामान्य डायबिटीज देखभाल दी गई, जबकि दूसरे समूह ने संरचित लैक्टो-शाकाहारी आहार के साथ प्रतिदिन 14 घंटे का समय-सीमित उपवास अपनाया।

इस आहार में साबुत अनाज, अधिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थ, सब्जियां, फल, दालें और डेयरी उत्पाद शामिल थे। प्रतिभागियों ने प्रतिदिन लगभग 10 घंटे की अवधि में भोजन किया और शेष 14 घंटे का समय बिना भोजन के रखा।

अध्ययन के 24 सप्ताह बाद हस्तक्षेप समूह का समायोजित औसत HbA1c 6.53 प्रतिशत रहा, जबकि सामान्य देखभाल वाले समूह में यह 7.65 प्रतिशत था। यानी दोनों समूहों के बीच HbA1c में 1.12 प्रतिशत अंक का अंतर पाया गया। साथ ही शरीर का वजन, BMI, रक्त शर्करा, लिपिड प्रोफाइल और इंसुलिन रेजिस्टेंस के संकेतक HOMA-IR में भी बेहतर परिणाम देखे गए।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अध्ययन इस बात के उत्साहजनक प्रमाण देता है कि सांस्कृतिक रूप से अनुकूल शाकाहारी आहार और नियमित समय-सीमित भोजन टाइप-2 डायबिटीज के प्रबंधन में उपयोगी हो सकता है। हालांकि, अध्ययन से यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि सुधार केवल 14 घंटे के उपवास के कारण हुआ, क्योंकि प्रतिभागियों ने आहार, भोजन की मात्रा, पोषण संबंधी सलाह और व्यवहार संबंधी सहायता जैसे कई बदलाव एक साथ अपनाए थे।

विशेषज्ञों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि अध्ययन में केवल 25 से 60 वर्ष की भारतीय महिलाओं को शामिल किया गया था और इंसुलिन लेने वाले लोगों को अध्ययन से बाहर रखा गया था। इसलिए इन परिणामों को अन्य आयु समूहों, पुरुषों या इंसुलिन लेने वाले मरीजों पर सीधे लागू करने के लिए आगे और शोध की आवश्यकता है।

महत्वपूर्ण: डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को उपवास या भोजन में बड़ा बदलाव अपने डॉक्टर/डायटिशियन की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, खासकर यदि वह रक्त शर्करा कम करने वाली दवाएं ले रहा हो।

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